"बस यूँ ही " .......अमित

"शब्द भीतर रहते हैं तो सालते रहते हैं, मुक्त होते हैं तो साहित्य बनते हैं"। मन की बाते लिखना पुराना स्वेटर उधेड़ना जैसा है,उधेड़ना तो अच्छा भी लगता है और आसान भी, पर उधेड़े हुए मन को दुबारा बुनना बहुत मुश्किल शायद...।

बुधवार, 10 जून 2026

शून्य की गूंज।

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 शून्य के भीतर भी , होते हैं बहुत सारे शून्य , जब जब तुम चुप हुए , शून्य अटकते गए , एक के भीतर एक , फिर एक और एक, कितनी भी बातें , कोई और कर...
मंगलवार, 9 जून 2026

हाबिस / अरिया

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 जिन लोगों ने 'प्लांट' या किसी 'कॉन्स्ट्रक्शन' इकाई में 'इरेक्शन / कमीशनिंग' का कार्य कराया होगा या ऐसे किसी क्षेत्र...
शुक्रवार, 5 जून 2026

इत्ती सी ख्वाहिश।

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तुम कानों में झुमकों की जगह छोटी छोटी सी wind chime पहन लेना। जब जब बजेगी समझना चुपके से कुछ कहा है हमने। फिर जवाब में खत लिख देना। बस इत्ती...
बुधवार, 3 जून 2026

पीरियॉडिक टेबल।

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कोई भी विषय कठिन नही होता है। अगर शिक्षक को अपना विषय एकदम स्पष्ट है तब वह बच्चों को कठिन से कठिन विषय को सरल रूपांतर कर समझा सकता है। पीरिय...
मंगलवार, 2 जून 2026

गद्य और पद्य।

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रेलगाड़ी घुमावों पर बहुत लुभाती है। सीधी चलती रहने पर सभी डिब्बों को एक दूसरे के आगे पीछे होने का भ्रम होता है पर घुमावों पर गोल हो कर मुड़ते ...
गुरुवार, 7 मई 2026

बातें शहद सी।

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केचप की बॉटल हो या शहद का जार हो उससे सॉस या शहद उड़ेलने के बाद उसके मुँह के कगार पर जो सॉस या शहद लगी रह जाती है उसे प्रायः अंगुली से लपेट क...
1 टिप्पणी:
मंगलवार, 5 मई 2026

पूँछ।

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ऐसा बताया जाता है कि पहले मनुष्यों के पूँछ होती थी , निष्प्रयोज्य होने के कारण धीरे धीरे लुप्त हो गई। यह बात ध्यान में आते ही मुझे आभास हुआ ...
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